रह-ए-तलब में गिरे होते सर के बल हम भी — मीर तक़ी मीर
“In the path of longing, we too fell on our foreheads, But the broken-hearted found and gathered us up.”
अर्थ
रह-ए-तलब में गिरे होते सर के बल हम भी, शिकस्ता-पाई ने अपनी हमें सँभाल लिया। इसका अर्थ है कि हम भी चाहत के मार्ग में सिर के बल गिर गए थे, लेकिन टूटे दिल वालों ने हमें सहारा दिया और संवार लिया।
विस्तार
यह शेर इंसान की नज़ाकत और किसी के सहारे की ज़रूरत को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि हम भी चाहत और तड़प की राह पर लड़खड़ाकर गिर जाते। लेकिन जब हम टूटने वाले थे, तो एक 'शिकस्ता-पाई' ने आकर हमें संभाल लिया। यह एहसास बहुत गहरा है कि ज़िंदगी के सबसे मुश्किल वक़्त में भी कोई हमें सहारा देने के लिए मौजूद होता है।
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