खिंचेगी कब वो तेग़-ए-नाज़ यारब — मीर तक़ी मीर

खिंचेगी कब वो तेग़-ए-नाज़ यारब रहे हैं देर से सर को झुका हम

“When will she pull the bow of her playful grace, my beloved? We have been bowing our heads for a long time.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

कब वह अपने नखरे का धनुष खींचेगी, मेरे प्रिय? हम तो बहुत देर से अपना सिर झुकाए बैठे हैं।

विस्तार

यह शेर उस आशिक़ की बेताबी और इंतज़ार को बयां करता है। शायर पूछते हैं कि वह नाज़ की तीर कब खिंचेगी? वे कहते हैं कि हम बहुत देर से हैं कि अपना सर झुका पाए। यह इंतज़ार का दर्द है, वो बेचैनी है जब मोहब्बत में उम्मीदें चरम पर होती हैं, लेकिन मंज़िल दूर ही रहती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.