फ़ैज़ ऐ अब्र चश्म-ए-तर से उठा — मीर तक़ी मीर
“From the fountain of your eyes, Faiz has risen, Today, its expansive curtain is wide.”
अर्थ
फ़ैज़ ऐ अब्र चश्म-ए-तर से उठा, आज दामन वसीअ है इस का। इसका अर्थ है कि फ़ैज़ (شاعر) तुम्हारे आँसुओं के स्रोत से उठा है, और आज इसका विशाल आवरण (या प्रभाव) फैला हुआ है।
विस्तार
यह शेर एक ऐसे पल का वर्णन करता है जब आँसुओं का सैलाब थम जाता है। शायर कहते हैं कि ग़म का पर्दा उठ चुका है... और आज महबूब का साया, उनका दामन, इतना विशाल और सुकून देने वाला है कि सारी तड़प मिट गई है। यह एक ऐसी राहत है जो दिल को पूरी तरह से भर देती है, जैसे कोई गहरा सुकून मिल गया हो।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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