बहर कम-ज़र्फ़ है बसान-ए-हबाब — मीर तक़ी मीर

बहर कम-ज़र्फ़ है बसान-ए-हबाब कासा-लैस अब हुआ है तू जिस का

“Your eloquence is lacking, O beloved's speech, For you are unlike anyone who has passed.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे महबूब, तुम्हारे वचनों में मिठास की कमी है, क्योंकि तुम ऐसे हो जिनका कोई मुकाबला नहीं।

विस्तार

यह शेर उस महबूब की बेमिसाल खूबसूरती और गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि इश्क़ की भाषा, एहसास का दायरा... ये सब सीमित हैं। आप इतने अनोखे हैं कि इन शब्दों में आपको बयान करना नामुमकिन है। यह पंक्तियाँ उस अद्वितीय एहसास को समर्पित हैं, जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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