ताब किस को जो हाल-ए-मीर सुने — मीर तक़ी मीर

ताब किस को जो हाल-ए-मीर सुने हाल ही और कुछ है मज्लिस का

“To whom shall I relate the state of Mir's condition? The state of this gathering is something else entirely.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर किसे मीर की हालत सुनाएगा? इस महफ़िल का हाल तो कुछ और है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरी आत्म-जागरूकता को दर्शाता है। जब शायर कहते हैं, 'ताब किस को जो हाल-ए-मीर सुने?' तो वह बड़ी नज़ाकत से श्रोताओं की अत्यधिक जिज्ञासा पर व्यंग्य कर रहे हैं। दूसरी पंक्ति, 'हाल ही और कुछ है मज्लिस का,' ध्यान को कहीं और ले जाती है। उनका कहना है कि असली ड्रामा या 'हाल' उनकी निजी तकलीफों में नहीं, बल्कि इस महफ़िल, इस माहौल में है।

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