दाग़ आँखों से खिल रहे हैं सब — मीर तक़ी मीर

दाग़ आँखों से खिल रहे हैं सब हाथ दस्ता हुआ है नर्गिस का

“From the eyes, the stains are blooming brightly, While the hand is wrapped in the narcissus.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

आँखों से दाग़ खिल रहे हैं सब, और हाथ नर्गिस से बंधा है।

विस्तार

मिर्ज़ा के इस शेर में ग़म की गहराई बयां की गई है। 'दाग़' आँखों से खिलना मतलब है कि दर्द इतना गहरा है कि वो आँखों में, चेहरे पर, एक खूबसूरत निशानी बनकर उभर आया है। नर्गिस का दाग़... यह सिर्फ़ फूल का रंग नहीं है, बल्कि इश्क़ के ज़ख्मों का वो नज़ारा है जो हाथ पर हमेशा के लिए बस गया है। यह दर्द और खूबसूरती का एक बहुत ही ख़ूबसूरत संगम है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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