किया दर्द-ओ-ग़म ने मुझे ना-उमीद — मीर तक़ी मीर
किया दर्द-ओ-ग़म ने मुझे ना-उमीद
कि मजनूँ को ये ही थीं बीमारियाँ
“Did pain and sorrow leave me hopeless, / Or were these the very illnesses of Majnun?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दर्द और ग़म ने मुझे निराश किया, या मजनूँ को यही बीमारियाँ थीं।
विस्तार
ये शेर सिर्फ़ महबूब के दर्द की बात नहीं करता.... ये तो ज़िंदगी के सबसे गहरे सवाल को उठाता है! शायर यहाँ अपनी उस हालत का ज़िक्र कर रहे हैं.... जब उनका ग़म इतना बढ़ जाता है कि उन्हें शक होने लगता है... कि क्या यह दर्द सिर्फ़ मजनूँ की कहानी थी? या ये दर्द तो इंसानी तन्हाई का हिस्सा है?
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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