ख़त-ओ-काकुल-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-अंदाज़-ओ-नाज़ — मीर तक़ी मीर

ख़त-ओ-काकुल-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-अंदाज़-ओ-नाज़ हुईं दाम-ए-रह सद-गिरफ़्तारियाँ

“From the letters, the braid, the tresses, the demeanor, and the coquetry, I have been captured in the bondage of love's journey.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ख़त, काकुल, ज़ुल्फ़, अंदाज़ और नाज़—इन सब चीज़ों के दाम में मैं प्रेम के मार्ग की सद-गिरफ़्तारियों में फँस गया हूँ।

विस्तार

यह शेर महबूब की अदाओं और नज़ाकत का कमाल बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब की ख़त, ज़ुल्फ़, अंदाज़ और नाज़—ये सब मिलकर.... एक रास्ते पर सदियों के जाल बन गए हैं। यह एहसास है कि महबूब की सादगी भी कितनी क़ैदगर्दगी कर सकती है। एक नज़ारा, जो दिल को मदहोश कर दे!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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