किस को दिमाग़-ए-शेर-ओ-सुख़न ज़ोफ़ में कि 'मीर' — मीर तक़ी मीर

किस को दिमाग़-ए-शेर-ओ-सुख़न ज़ोफ़ में कि 'मीर' अपना रहे है अब तो हमें बेशतर ख़याल

“To whom, O Mir, do you keep the mind of poetry and speech, in your fold? Now, we have much more to think about.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ऐ मीर, तू अपनी शायरी और बातों का दिमाग़ किसके पास रख रहा है? अब तो हमें और भी बहुत कुछ सोचना है।

विस्तार

यह शेर एक शायर की मानसिक उलझन को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। मीर तक़ी मीर पूछ रहे हैं कि अब वह अपना शे’र और सुखन किसके लिए करें। वह कहते हैं कि उनका दिमाग़ अब बहुत ज़्यादा विचारों से भरा हुआ है, कि किसी एक महबूब या किसी एक बात पर दिल लगाना मुमकिन नहीं। यह उस कलाकार के दिल की बात है, जिसके दिल में बहुत सारी भावनाएँ उमड़ रही हों।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.