मैं ने क्या उस ग़ज़ल को सहल किया — मीर तक़ी मीर

मैं ने क्या उस ग़ज़ल को सहल किया क़ाफ़िए ही थे उस के ऊट-पटाँग

“What did I do to that ghazal, that I found it so easy? / Its rhyme scheme was nothing but nonsense.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैंने उस ग़ज़ल को क्या आसान समझा, कि उसके क़ाफ़िए ही ऊट-पटांग थे।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि कला की गहराई पर एक गहरा तंज़ है। शायर साहब कह रहे हैं कि उन्होंने कभी भी ग़ज़ल को आसान नहीं बनाया। उनका मानना है कि महज़ क़ाफ़िए (rhymes) का होना काफ़ी नहीं होता। असली शायरी तो रूह से निकलनी चाहिए, सिर्फ़ सुनने में मीठी लगने वाली तुकबंदी से नहीं। यह ग़ज़ल की आत्मा की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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