चली जाती है हसब क़द्र-ए-बुलंद — मीर तक़ी मीर

चली जाती है हसब क़द्र-ए-बुलंद दूर तक उस पहाड़ की है डाँग

“The worth of the beloved departs, / The mountain's crest stretches far away.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

पहाड़ की चोटी दूर तक फैली है, और वह (किसी की) कद्र उतनी ही दूरी तक चली जाती है जितनी कि उसकी बुलंदी है।

विस्तार

यह शेर हमें प्रकृति के माध्यम से जीवन का एक गहरा सबक सिखाता है। शायर कह रहे हैं कि जो चीज़ अपनी क़द्र में बुलंद होती है, उसका दायरा या प्रभाव बहुत दूर तक जाता है। जैसे किसी ऊँचे पहाड़ का रास्ता दूर तक फैला होता है, वैसे ही किसी महान व्यक्ति या विचार का असर भी कहीं न कहीं बहुत दूर तक होता है। यह स्थायी प्रभाव की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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