किस तरह उन से कोई गर्म मिले — मीर तक़ी मीर
किस तरह उन से कोई गर्म मिले
सीम-तन पिघले जाते हैं जों राँग
“How can anyone get warmth from them, Their colored forms simply melt away.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उनसे कोई गर्मी कैसे मिल सकती है, उनके रंगीन रूप पिघलते चले जाते हैं।
विस्तार
यह शेर उस इश्क़ की गहराई को बयां करता है जो सिर्फ़ रूह तक महसूस होता है। शायर कहते हैं कि महबूब से कोई गर्मजोशी मिलना तो दूर की बात है.... बस उनकी 'रंग' (यानी उनकी मौजूदगी) ही... हमारे सीम-तन को पिघला देती है। यह कैसा जादू है! जहाँ इश्क़ इतना गहरा हो कि दिल की हर कायनात बस एक झलक से पिघल जाए। यह समर्पण का एहसास है, दोस्त।
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