बुझ गए हम चराग़ से बाहर
कहियो ऐ बाद-ए-शम्अ' महफ़िल तक
“We have extinguished the lamp, O breeze, tell the gathering”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हम चराग़ (दीपक) से बाहर बुझ गए हैं, ऐ शम्अ़ की हवा (बद-ए-शम्अ), महफ़िल तक कह देना।
विस्तार
देखिए, मिर्ज़ा ने यहाँ रोशनी और महफ़िल का बहुत गहरा तफ़सील किया है। 'चराग़' हमारे दिल की रौशनी है, हमारी मोहब्बत है। जब शायर कहते हैं कि 'बुझ गए हम चराग़ से बाहर', तो मतलब है कि हमने अपना सच्चा जज़्बा, अपनी रौशनी, कहीं और ही बुझा दी। लेकिन फिर वह हवा से गुहार लगाता है... कि इस बात को महफ़िल तक पहुँचा दे! यह एक टूटे हुए दिल की आवाज़ है।
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