जब आया आह तब अपने ही सर पर — मीर तक़ी मीर
जब आया आह तब अपने ही सर पर
गया ये हाथ कब उस की कमर तक
“When the sigh arrived, it fell upon one's own head; When did this hand reach the waist of that one?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब आह आई तो वह अपने ही सिर पर पड़ी; यह हाथ कब उस की कमर तक पहुँचा।
विस्तार
यह शेर दर्द के एक बहुत गहरे पहलू को छूता है। शायर कहते हैं कि आहें, यानी जो दुख या दर्द हमें सताता है, वो अक्सर हमारे अपने मन से ही आता है। उन्होंने बाहरी दुनिया से अपने हाथ की तुलना, अपने सिर पर पड़े दर्द से की है। यह एक सवाल है कि क्या हमारा दर्द कभी किसी और के कारण होता है, या ये तो हमारे अंदर की ही कहानी है।
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