रग-ए-जाँ कब आती है आँखों में 'मीर' — मीर तक़ी मीर

रग-ए-जाँ कब आती है आँखों में 'मीर' गए हैं मिज़ाज उस कमर की तरफ़

“When will the vein of life appear in the eyes, O Meer? / The temperament has gone towards that waist.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

रग-ए-जाँ कब आँखों में आएगी, ऐ मीर? मिज़ाज उस कमर की ओर चला गया है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि कैसे इश्क़ का जुनून, गहरे दर्द को भी भुला देता है। शायर पूछ रहे हैं कि 'रग-ए-जाँ' (जो ज़िंदगी की नब्ज़ होती है) कब आँखों में दिखेगी, पर जवाब मिलता है कि उनका मिज़ाज तो सिर्फ़ उस कमर की तरफ़ गया है। यह नज़्म सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण की बात नहीं करती, बल्कि बताती है कि जब चाहत बहुत गहरी हो जाती है, तो वह दर्द को भी एक पल के लिए भुला देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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