ग़ुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर — मीर तक़ी मीर

ग़ुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर जाते रहेंगे हम भी गरेबान फाड़ कर

“If you rise in a fit of anger, I too will tear the veil and depart, As if shaking off the curtain, I will walk away with you.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

यदि तुम क्रोध से उठकर चले जाओ, तो हम भी पर्दा झाड़कर जाते रहेंगे।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत की उस बेतहाशा गहराई को बयान करता है, जहाँ वफ़ा की कोई सीमा नहीं होती। शायर कह रहे हैं कि अगर महबूब ग़ुस्से में भी चला जाए, अपनी इज़्ज़त और पर्दों को झाड़कर, तब भी हम पीछे नहीं हटेंगे। 'गरेबान फाड़ कर' का मतलब है कि हम अपनी सारी हिफाज़त, अपनी सारी निजता को फाड़कर भी आपके पीछे चलते रहेंगे। यह वफ़ादारी का एक ऐसा इज़हार है जो दर्द से भी डरता नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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