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ख़ाक को मेरी सैर कर के फिरा
वो ग़ज़ाल-ए-रमीदा के मानिंद

Having wandered through my dust,

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरी धूल में सैर करने के बाद, वह एक रमीदा ग़ज़ल की तरह था।

विस्तार

यह शेर बहुत ही नज़ाकत से लिखा गया है। यहाँ 'ख़ाक' सिर्फ़ धूल नहीं है, बल्कि शायर का अपना वजूद है, उसका साधारण जीवन है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि महबूब ने मेरे इस साधारण से वजूद को भी.... जिस तरह कोई खूबसूरत ग़ज़ल को देखती है, उसी इज़्ज़त और नज़ाकत से देखा। यह प्रेम का वो रूप है, जहाँ हर चीज़ को कला समझा जाता है।

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