कसरत में दर्द-ओ-ग़म की न निकली कोई तपिश — मीर तक़ी मीर
कसरत में दर्द-ओ-ग़म की न निकली कोई तपिश
कूचा जिगर के ज़ख़्म का शायद कि तंग था
“In the struggle, no heat emerged from pain and sorrow's ache, Perhaps the alleyway of the heart's wounds was too confined.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कसरत करने पर दर्द और ग़म की कोई तपिश नहीं निकली, शायद दिल के ज़ख़्म का रास्ता ही बहुत तंग था।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जो बाहर नहीं निकल पाता। शायर कहते हैं कि गम और दर्द की कसरत के बावजूद, कोई तपिश नहीं निकली। इसका मतलब है कि दुःख इतना गहरा था कि दिल के ज़ख्म की गली, यानी जज़्बात का कोना, शायद इतना तंग था कि वह पूरी तरह से महसूस भी नहीं हो पाया। यह एक अजीब सी अंदरूनी उलझन है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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