शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मिरे जी पे तंग था — मीर तक़ी मीर

शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मिरे जी पे तंग था आया शब-ए-फ़िराक़ थी या रोज़-ए-जंग था

“The night of sorrow and grief was tormenting my life for ages; was the night of separation, or was it the day of battle?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से युगों से मेरा जीवन परेशान था; क्या यह विरह की रात थी या युद्ध का दिन?

विस्तार

यह शेर भावनात्मक अनिश्चितता की गहन बेचैनी को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि ग़म ने तो उन्हें बहुत तंग किया हुआ था। जब एक नई रात आती है, तो उन्हें समझ नहीं आता कि यह बिछड़ने का दर्द है, या किसी जंग का तूफ़ान। यह जीवन में दो बड़े दर्द के बीच की उलझन है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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