गो कि आतिश-ज़बाँ थे आगे 'मीर' — मीर तक़ी मीर
“O Mir, your verses were fiery and brilliant in the past, Now tell me, those times are long gone and passed.”
अर्थ
गो, कि आतिश-ज़बाँ थे आगे 'मीर', अब की कहिए गई वो तब की बात। इसका शाब्दिक अर्थ है कि मीर, आपके काव्य में पहले आग जैसी ज़बान (यानी जोश और ऊर्जा) थी, लेकिन अब वे समय बीत गया है।
विस्तार
यह शेर समय के बदलाव और जुनून की फीकी पड़ चुकी लौ का बेहतरीन तसव्वुर है। मीर तक़ी मीर एक गहरी उदासी और यादों के साथ बात कर रहे हैं। वो एक ऐसे दौर की बात कर रहे हैं जब भावनाएं बहुत ज़ोरदार, बहुत आतिशी थीं। शायर कहते हैं कि वो वक़्त गुज़र चुका है, और अब बस एक गहरा तन्हाई का एहसास बचा है।
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