किस का रू-ए-सुख़न नहीं है उधर — मीर तक़ी मीर

किस का रू-ए-सुख़न नहीं है उधर है नज़र में हमारी सब की बात

“Whose conversation is not scented with fragrance, oh you, In our gaze, we speak of everyone's affair.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ओहे, जिसका सुगंधित वचन नहीं है, उधर, हमारी नज़र में सबकी बात है।

विस्तार

यह शेर नज़र की ताक़त को बयान करता है। शायर कहते हैं कि हर किसी के बोलने का एक अंदाज़ होता है, लेकिन हमारी नज़र में... वो सब कुछ साफ़ है। यह सिर्फ़ देखना नहीं है, यह तो दिल को पढ़ लेना है! मिर्ज़ा ने बताया है कि इंसान अपनी बातों से कितना भी छुपने की कोशिश करे, पर आँखें सब देख लेती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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