रह गया देख के तुझ चश्म पे ये सतर-ए-मिज़ा
साक़िया यूँ तो पढ़े थे मैं ख़त-ए-जाम बहुत
“Seeing the sheer grace upon your spectacles, I have become so infatuated; the tavern-songs, I had heard many tales of the cup.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारे चश्मे पर यह नज़ाकत देखकर मैं मोहित हो गया; साक़िया, मैंने तो जाम के कई किस्से सुने थे।
विस्तार
यह शेर उस पल को बयान करता है जब महबूब की सादगी और खूबसूरती, शायर के सारे अनुभव को फीका कर देती है। शायर कहते हैं कि मैंने जाम (शराब के प्याले) से बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी हैं, यानी मैं इश्क़ के हर रंग से वाकिफ हूँ। लेकिन जब उनकी आँखों में यह प्राकृतिक नज़ाकत (सतर-ए-मिज़ा) दिखी.... तो मेरा दिल थम गया! यह एहसास किसी भी नशे से कहीं ज़्यादा गहरा है।
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