थी मस्लक-ए-उल्फ़त की मशहूर ख़तरनाकी — मीर तक़ी मीर
थी मस्लक-ए-उल्फ़त की मशहूर ख़तरनाकी
मैं दीदा-ओ-दानिस्ता किस राह में पा रखा
“The famous danger of the affection's school, On what path have I found the sight and the wisdom?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रेम के विद्यालय का प्रसिद्ध ख़तरा क्या है, कि मैंने दृष्टि और ज्ञान किस राह पर पा लिया।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयान करता है जब आशिक़ को अपनी ही नज़रों और समझदारी का एहसास होता है। शायर कह रहे हैं कि इश्क़ का रास्ता तो ख़तरनाक ही है, ये तो सबको पता है। लेकिन असली सवाल ये है कि मैंने ये आँखें और ये दिमाग़ किस राह पर पा लिया? यह एक आत्म-संघर्ष है—हम अपने एहसास से ही सबसे ज़्यादा डरते हैं।
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