हाज़िर यराक़-ए-बे-मज़गी किस घड़ी नहीं मा'शूक़ कुछ हमारा है आशिक़-नबर्द सा

“Oh, the intoxication of the absence of your beloved, in what moment is it not present? My beloved is like a lover who is not born.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे मेरे प्रिय, तुम्हारी अनुपस्थिति का नशा किस पल नहीं है? मेरे प्रिय, तुम एक ऐसे आशिक़ जैसे हो जो पैदा नहीं हुआ।

विस्तार

देखिए, शायर साहब यहाँ इश्क़ के दो पहलू बता रहे हैं। एक तरफ़ तो ये कह रहे हैं कि बे-मज़गी का रास्ता हर पल मौजूद है। लेकिन दूसरी तरफ़ उनका इशारा महबूब की तरफ़ है। महबूब का ये नक़ाब ओढ़ना, ये आशिक़-नबर्द सा होना... ये ही सबसे बड़ी उलझन है। शायर बता रहे हैं कि महबूब खुद एक आवारा आशिक़ है, जो कभी भी, कहीं भी, हमें धोखा दे सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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