तिरे उस ख़ाक उड़ाने की धमक से ऐ मरी वहशत — मीर तक़ी मीर

तिरे उस ख़ाक उड़ाने की धमक से ऐ मरी वहशत कलेजा रेग-ए-सहरा का भी दस दस गज़ थिलक्ता था

“O my beloved, from the threat of scattering dust from that side, Even the heart of the desert was ready to fall by ten yards.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे मेरी वहशत, तुम्हारे उस धूल उड़ाने की धमकी से, रेगिस्तान के दिल का भी दस-दस गज तक काँपना था।

विस्तार

यह शेर प्रेम की पीड़ा को एक अद्भुत अतिशयोक्ति (hyperbole) के साथ प्रस्तुत करता है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब की बस धूल उड़ाने की धमकी से भी वशहत के दिल को इतना डर लगा कि वह रेगिस्तान के दिल जैसा नाज़ुक हो गया। रेगिस्तान का दिल होना, यानी सबसे कठोर और निर्जन जगह का भी दिल टूटना, दर्द की पराकाष्ठा को दर्शाता है। यह बताता है कि महबूब का साया मात्र एक ख़तरा है, जो वजूद को तहस-नहस करने के लिए काफी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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