नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था — मीर तक़ी मीर

नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था गुलाबी रोती थी वाँ जाम हँस हँस कर छलकता था

“In the tavern, the color of wine shone through new styles, The cup, weeping pink, overflowed with laughter.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नई शैलियों से मयखाने में शराब का रंग चमकता था, और वह गुलाबी आँसू रोता हुआ जाम हँसते-हँसते छलकता था।

विस्तार

यह शेर मयखाने के माहौल का बहुत ही ख़ूबसूरत नज़ारा पेश करता है। शायर बताते हैं कि यहाँ नशा सिर्फ़ पीया नहीं जाता, बल्कि एक रंगत की तरह झलकता है। और वो दूसरा मिसरा... गुलाबी जाम, जो रो भी रहा है और हँस भी रहा है! यह ज़िंदगी की उस उलझन को दिखाता है, जहाँ खुशी और ग़म, दोनों एक साथ होते हैं। यह सिर्फ़ शराब नहीं, यह भावनाओं का बहकावा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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