आई अगर बहार तो अब हम को क्या सबा — मीर तक़ी मीर
आई अगर बहार तो अब हम को क्या सबा
हम से तो आशियाँ भी गया और चमन गया
“If this is spring, then what is for us now? Both the beloved's abode and the garden have departed.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर यह बहार है, तो अब हमारा क्या होगा? न तो महबूब का बसेरा रहा और न ही बाग़-बगीचा।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी उदासी और निराशा को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि अगर बाहर मौसम कितना भी खूबसूरत हो, बहार कितनी भी आ जाए, तो हमें उसकी परवाह नहीं। क्यों? क्योंकि हमारी ज़िंदगी की दो सबसे ज़रूरी चीज़ें—अपना आशियाना और अपनी दुनिया (चमन)—दोनों हमसे दूर हो चुकी हैं। जब सब कुछ खो जाए, तो कोई भी नज़ारा बेमानी लगता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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