हासिल न पूछ गुलशन-ए-मशहद का बुल-हवस याँ फल हर इक दरख़्त का हल्क़-ए-बुरीदा था

“Do not ask about the desire of the garden of the shrine; every fruit was a circle of suffering.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

गुलशन-ए-मशहद की इच्छा के बारे में मत पूछो; हर एक फल दुख के घेरे में बंधा था।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने बहुत गहराई से लिखा है। शायर कहते हैं कि महबूब के गुलशन का जो जुनून है, उस बारे में मत पूछना.... क्योंकि वहाँ हर फल, हर खूबसूरती, बस जुदाई की एक सीमा थी। यह हमें सिखाता है कि जहाँ भी खूबसूरती है, उसके पीछे कोई न कोई दर्द छुपा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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