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मत पूछ किस तरह से कटी रात हिज्र की
हर नाला मेरी जान को तेग़-ए-कशीदा था

Do not ask how the night was spent in separation, Every stream (of my tears) was a sword drawn against my life.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मत पूछ कि बिछड़ने की रात कैसे गुज़री, हर नाला मेरी जान पर तलवार सा वार कर रहा था।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने विरह की उस असहनीय पीड़ा को बयां किया है। शायर कहते हैं कि रात का गुज़रना पूछो मत, क्योंकि यह दर्द इतना गहरा था कि यहाँ तक कि आँसुओं की धारा भी.... मेरी जान के लिए तलवार बन गई थी! हर नाला, हर बूँद... एक तेग़़-ए-कशीदा थी। यह सिर्फ़ उदासी नहीं, यह रूह का ज़ख़्म है।

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