अफ़्सोस मर्ग सब्र है इस वास्ते कि वो गुल-ए-हा-ए-बाग़ इशरत-ए-दुनिया नचीदा था

“What regret is there, except for patience, for that The flower of the garden, never saw the flirtation of the world.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अफ़सोस सिर्फ़ सब्र का है, क्योंकि वह बाग़ का फूल है जिसने दुनिया का तमाशा कभी नहीं देखा।

विस्तार

यह शेर दिल की गहरी उलझन को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि पछतावा, अफसोस, सब्र का नहीं है, बल्कि इस वजह से है कि महबूब ने दुनिया की बेपरवाह निगाहों को देखा है। जब कोई इतना गहरा प्यार महसूस करता है, और फिर वह महबूब दुनिया की चमक-दमक से गुज़रता है, तो दिल को एहसास होता है कि ये प्यार दुनिया के लिए कितना नाज़ुक था।

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