सन्नाहटे में जान के होश-ओ-हवास-ओ-दम न था
अस्बाब सारा ले गया आया था इक सैलाब सा
“In the silence, I had lost my senses, my awareness, and my very breath; Everything was taken away by a flood like force of nature.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सन्नाटे में जान के होश-ओ-हवास-ओ-दम नहीं था, सारा सामान एक सैलाब की तरह ले गया आया था।
विस्तार
यह शेर एक ऐसी अवस्था का वर्णन करता है जब इंसान अपनी भावनाओं के तूफ़ान में बह जाता है। शायर कह रहे हैं कि उस गहरे सन्नाटे में, उनका होश, हवास और जान... सब कहीं खो गए थे। यह कोई धीमी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सैलाब था जो अचानक आया और उनके पूरे वजूद को बहा ले गया। यह विस्मय और वजूद के टूटने का एहसास है।
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