जब पास रात रहना आता है याद उस का थमता नहीं है रोना दो दोपहर हमारा

“When the night approaches and the memory of him comes, / The crying doesn't stop; let us weep for two afternoons.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब रात पास आती है और उसकी याद आती है, तो रोना रुकता नहीं है; हमें दो दोपहर तक रोने दो।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयान करता है जो थमने नहीं देता। शायर कहते हैं कि जब रात आती है और महबूब की याद सताती है, तो रोना रुकता ही नहीं। यह कैसा दर्द है, जो सिर्फ रात में नहीं, बल्कि दिन की दोपहर में भी हमें रुला देता है! यह इश्क़ का वो आलम है जहाँ गम को समय की कोई परवाह नहीं होती।

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