पाया न दिल बहाया हुआ सैल-ए-अश्क का — मीर तक़ी मीर

पाया न दिल बहाया हुआ सैल-ए-अश्क का मैं पंजा-ए-मिज़ा से समुंदर बिलो चुका

“The mountain-sea of tears, I could not find its shore, With the paw of my temper, I made the ocean roar.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरे मिजाज के पंजे से, मैंने आँसुओं के पहाड़ को समंदर बना दिया, पर मैं उसका किनारा नहीं खोज पाया।

विस्तार

यह शेर गहरे गम और बेबसी को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उनका दुःख इतना बड़ा है कि उन्होंने अपनी तड़प के पंजे से पूरा समंदर रो दिया। लेकिन, इतनी रोने के बाद भी, उन्हें वह दिल नहीं मिला जो उनके आँसुओं के सैलाब में खो गया था। यह उस दर्द का इज़हार है जिसका कोई ठिकाना नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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