यक चश्मक-ए-प्याला है साक़ी बहार-ए-उम्र — मीर तक़ी मीर
“The cup of your intoxicating grace, O cupbearer, is the spring of life; I doze, and suddenly, it is all over.”
अर्थ
यह चश्मे जैसा प्याला है साक़ी, जो जीवन का वसंत है; झपकी लगी और अचानक, यह सब खत्म हो गया।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के उस मीठे भ्रम को बयान करता है, जो पल भर में गुज़र जाता है। शायर साक़ी से कह रहे हैं कि ये प्याला तो ज़िंदगी की बहार है, जो बहुत खूबसूरत है। लेकिन दूसरी लाइन में जो अहसास है, वह बहुत गहरा है—कि कब नींद आ गई और कब ये लम्हा हमेशा के लिए दूर हो गया। यह समय के इस नज़ारे को पकड़ता है कि ख़ूबसूरत पल बस झपकी लेते ही गुज़र जाते हैं।
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