गुज़रे है लहू वाँ सर हर ख़ार से अब तक — मीर तक़ी मीर

गुज़रे है लहू वाँ सर हर ख़ार से अब तक जिस दश्त में फूटा है मिरे पाँव का छाला

“My blood has passed through every thorn until now, In the desert where the blister of my foot has burst.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरे रक्त ने अब तक हर काँटे से गुज़रा है, जिस रेगिस्तान में मेरे पैर का छाला फटा है।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के सफर में सहने गए दर्द को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि हर काँटे से जो खून बह निकला है, अब तक वो सब एक छाले के रूप में हमारे पाँव पर उतर आया है। इसका मतलब है कि ज़िंदगी की मुश्किलें कितनी भी छोटी क्यों न हों, लेकिन उनका दर्द लगातार हमें थका देता है और निशान छोड़ जाता है। यह हिम्मत और सहनशीलता की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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