मा'मूर शराबों से कबाबों से है सब दैर — मीर तक़ी मीर

मा'मूर शराबों से कबाबों से है सब दैर मस्जिद में है क्या शैख़ पियाला न निवाला

“From the intoxication of wines and kebabs, everything is a deception; what is in the mosque? The Sheikh's cup, not a single morsel.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शराबों और कबाबों के नशे से सब कुछ एक भ्रम है; मस्जिद में क्या है? शेख का प्याला, न एक निवाला।

विस्तार

यह शेर इंसान की प्राथमिकताओं पर एक गहरा तंज है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि हमारी ज़िंदगी का ज़्यादातर वक़्त शराब और कबाब जैसे दुनियावी नशा में गुज़र जाता है। शायर पूछते हैं कि मस्जिद में क्या है, शैख़? ऐसा लगता है जैसे लोग आध्यात्मिकता से ज़्यादा दुनिया की चीज़ों में उलझे हुए हैं। यह एक बहुत ही विचारशील शेर है जो सांसारिक मोह और रूहानी खोज के बीच के अंतर को दिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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