ले चश्म-ए-नम-रसीदा पानी चुवाने कोई — मीर तक़ी मीर
ले चश्म-ए-नम-रसीदा पानी चुवाने कोई
वक़्त-ए-अख़ीर उस के बीमार तक न पहुँचा
“Who comes to draw water from the moist mirror of eyes, Never reached the sick one in the final moments of time.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आँखों के नम दर्पण से पानी पीने कोई आया, पर वक़्त-ए-अख़ीर उस बीमार तक कभी पहुँचा नहीं।
विस्तार
यह शेर जीवन की कड़वी सच्चाई बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि लोग मदद तो करने आते हैं, जैसे आंसू भरे चश्मे से पानी लाना... लेकिन जब इंसान को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, जब वह बीमार होता है, तब कोई उसके पास नहीं पहुँचता। यह किसी के सच्चे साथ न मिलने का दर्द है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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