जूँ नक़्श-ए-पा है ग़ुर्बत हैरान-कार उस की — मीर तक़ी मीर

जूँ नक़्श-ए-पा है ग़ुर्बत हैरान-कार उस की आवारा हो वतन से जो यार तक न पहुँचा

“Oh, the markings of separation are astonishing; how can one wander, having reached neither the homeland nor the beloved?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जुँ नक़्श-ए-पा है ग़ुर्बत हैरान-कार उस की, आवारा हो वतन से जो यार तक न पहुँचा। (अर्थ: विरह के निशान आश्चर्यजनक हैं; वह आवारा हो जो न तो वतन तक पहुंचा और न ही यार तक।)

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने विरह की उस गहरी पीड़ा को बयान किया है, जो भटकने से आती है। शायर कहते हैं कि बस ग़ुर्बत का नक़्श ही हैरान करने वाला होता है। यह उस आवारगी की बात है, जो वतन से दूर भटकती है, लेकिन अपने यार (प्रियतम) तक कभी नहीं पहुँच पाती। यह एक ऐसी यात्रा का दर्द है जो कभी खत्म नहीं होती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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