कहीं हैं 'मीर' को मारा गया शब उस के कूचे में
कहीं वहशत में शायद बैठे बैठे उठ गया होगा
“Somewhere, 'Mir' was killed in the streets of that city, Or perhaps, in a fit of madness, he simply rose up.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कहीं है 'मीर' को मारा गया शब उस के कूचे में, कहीं वहशत में शायद बैठे बैठे उठ गया होगा।
विस्तार
यह शेर सिर्फ एक गुमशुदगी की बात नहीं करता, बल्कि जीवन की अस्थिरता को बयान करता है। शायर मिर् तक़ी मीर कहते हैं कि मेरा वजूद इतना अनिश्चित है कि मैं कहीं किसी गली में मारा गया होगा, या शायद जंगल की शांति में बैठे-बैठे ही गायब हो गया हूँ। यह अहसास है कि हम सब एक पल में, किसी भी तरीके से, कहीं भी मिट सकते हैं।
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