दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें — मीर तक़ी मीर
दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें
था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का
“Even in Delhi, they no longer receive alms, Those who once possessed the mind of the Taj and the throne.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल्ली में उन्हें आज भीख भी नहीं मिलती, जिन्हें कल तक ताज और तख़्त का दिमाग़ था।
विस्तार
यह शेर, मिर् तकी मीर साहब का एक गहरा तंज़ है.... यह बताता है कि कैसे वक़्त के साथ इंसान की रुतबा और शान दोनों ग़ायब हो जाती हैं। शायर कहते हैं कि जो शख़्स कल तक ताज-ओ-तख़्त के आदी था, आज दिल्ली में भीख माँगने लायक़ नहीं बचा। यह सिर्फ़ दौलत की बात नहीं है, यह इंसान के गिरे हुए दर्जे की बात है।
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