जों बर्ग-हा-ए-लाला परेशान हो गया — मीर तक़ी मीर

जों बर्ग-हा-ए-लाला परेशान हो गया मज़कूर क्या है अब जिगर लख़्त लख़्त का

“The garden of roses has become restless, What is the name now of the heart, shredded into pieces?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जों बर्ग-हा-ए-लाला परेशान हो गया, तो अब दिल का क्या नाम है, जो टुकड़ों में बिखर गया।

विस्तार

यह शेर बाहरी दुनिया और दिल के अंदर के दर्द के बीच का गहरा अंतर बताता है। शायर कहते हैं कि जब बाहर का माहौल, यानी लाला का बाग, परेशान हो जाए, तो भी असली तकलीफ कहीं और है। वह तकलीफ है हमारे जिगर की, जो टुकड़ों में बिखर चुका है। यह दर्द इतना निजी होता है कि दुनिया उसे देख नहीं सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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