ख़ाक-ए-सियह से में जो बराबर हुआ हूँ 'मीर' — मीर तक़ी मीर
ख़ाक-ए-सियह से में जो बराबर हुआ हूँ 'मीर'
साया पड़ा है मुझ पे कसो तीरा-बख़्त का
“From the dust of black soot, I have reached such a height, O Mir, That the shadow of your fortune has fallen upon me.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
काली कालिख (ख़ाक-ए-सियह) से मैं जो बराबर आया हूँ, मीर, उस पर तुम्हारी किस्मत का साया पड़ रहा है।
विस्तार
यह शेर जीवन और प्रेम की जटिल उलझन को दर्शाता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि वो मौत की 'काली धूल' से बचकर ज़िंदा हुए हैं। लेकिन, मृत्यु से बचने के बावजूद, महबूब की बस एक 'छाया' भी उन पर पड़ना काफी है। यह दिखाता है कि इश्क़ का असर, मौत के डर से कहीं ज़्यादा गहरा और inescapable होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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