सब्ज़ान इन रू की जहाँ जल्वा-गाह थी — मीर तक़ी मीर

सब्ज़ान इन रू की जहाँ जल्वा-गाह थी अब देखिए तो वाँ नहीं साया दरख़्त का

“In this place of beauty, where the splendor once resided, Now look, the shadow of the tree is nowhere to be found.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

सब्ज़ान इन रू की जहाँ कभी रौनक और खूबसूरती थी, अब देखो तो वहाँ पेड़ की छाया कहीं नहीं है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है.... यह दिखाता है कि नश्वर दुनिया में कोई भी चीज़ हमेशा नहीं रहती। शायर एक ऐसी जगह का ज़िक्र कर रहे हैं जो कभी बहुत रौनक और नज़ारा हुआ करती थी। लेकिन आज जब वो देखते हैं, तो वहाँ सिर्फ़ खालीपन है.... किसी दरख़्त की परछाईं तक नहीं!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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