हर-दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का — मीर तक़ी मीर

हर-दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का टुकड़ा मिरा जिगर है कहो संग सख़्त का

“The temperament of the tavern is everywhere, but my heart is a piece of it; tell me, how is the hard way?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हरदम तरफ़ वैसे मिज़ाज करख़्त का, टुकड़ा मिरा जिगर है। कहो संग सख़्त का।

विस्तार

देखिए, यह शेर एक बहुत ही गहरी उपमा है। शायर अपने दिल को शराब की बोतल से तुलना करते हैं। उनका कहना है कि उनका मिजाज, उनकी ये बेचैनी, ये जुनून—यह किसी शराब की बोतल जैसा है। वो पूछ रहे हैं कि ये मिजाज तो आपके अंदर है, या ये तो सिर्फ़ इस इश्क़ की ताक़त है? यह इश्क़ की नशीली गहराई को बयान करता है।

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