शहर में जो नज़र पड़ा उस का
कुश्ता-ए-नाज़ या तग़ाफ़ुल था
“Of the one who caught my eye in the city, Was it the garment of coyness, or was it mere neglect?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शहर में जो नज़र पड़ा उस का, वह या तो नज़ाकत का लिबास था या फिर बेपरवाही।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस अनिश्चितता को बयान करता है, जब हमें यह समझ न आए कि सामने वाला व्यक्ति हमसे प्यार करता है या सिर्फ़ खेल रहा है। शायर पूछते हैं कि जब मेरी नज़र उस पर पड़ी, तो क्या वह नज़ाकत भरी शरारत थी... या फिर वह जानबूझकर मुझे अनदेखा कर रही थी? यह एक सवाल है जो आशिक़ के दिल में हमेशा घूमता रहता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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