जिस दम कि तेग़-ए-इश्क़ खिंची बुल-हवस कहाँ — मीर तक़ी मीर

जिस दम कि तेग़-ए-इश्क़ खिंची बुल-हवस कहाँ सुन लीजियो कि हम ही ने सीना-सिपर किया

“From the moment the arrow of love was drawn, where is the desire? Listen closely, for I have offered my chest (heart) as a shield.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जिस पल प्रेम का तीर चला, वहाँ वासना कहाँ? ध्यान से सुनो, मैंने अपना सीना (हृदय) ढाल बना दिया है।

विस्तार

यह शेर उस पल का वर्णन करता है जब मोहब्बत अपने सारे नकाब उतार देती है। शायर कहते हैं कि जब इश्क़ का तीर चलता है, तो घमंड और दिखावा (बुलहवस) कहीं नहीं बचता। सिर्फ़ एक बात बचती है—वो है दिल का खुलापन। शायर ने अपना सीना-सिपाही किया, यानी अपनी पूरी नज़रों के सामने अपनी कमज़ोरी रख दी। यह समर्पण ही सच्चे प्यार की निशानी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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