क्या जानूँ बज़्म-ए-ऐश कि साक़ी की चश्म देख — मीर तक़ी मीर

क्या जानूँ बज़्म-ए-ऐश कि साक़ी की चश्म देख मैं सोहबत-ए-शराब से आगे सफ़र किया

“What do I know of the tavern's assembly, seeing the cupbearer's gaze; I have journeyed beyond the company of wine.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं बंजारे की तरह हूँ, जो मदिरा के साथ रहने से आगे निकल गया है, इसलिए मुझे महफ़िल-ए-ऐश और साक़ी की नज़रों का क्या ज्ञान।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है। शायर कह रहे हैं कि उनका अनुभव सिर्फ़ महफ़िल की मस्ती या शराब के नशा से कहीं आगे निकल चुका है। जब आपने उस साक़ी के 'चश्म' (भाव/सार) को देख लिया, तो आपको पता चलता है कि असली सफ़र कहाँ है। यह किसी भौतिक ख़ुशी का इक़रार नहीं, बल्कि एक आत्मिक सफ़र का बयान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.