मरता हूँ जान दें हैं वतन-दारीयों पे लोग — मीर तक़ी मीर
“People sacrifice their lives for the homeland, and still they keep hearing that everyone has traveled (away).”
अर्थ
लोग वतन की हिफाज़त के लिए जान देने को तैयार रहते हैं, फिर भी लोग यह सुनते रहते हैं कि हर किसी ने सफर किया है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरा तजुर्बा बयां करता है। शायर कहते हैं कि लोग तो वतन के लिए मरने और जान देने की बातें करते हैं, पर सच्चाई यह है कि उन्हें बस यह बातें सुनाई देती हैं कि हर किसी ने अपना सफ़र तय कर लिया है। यह ज़ाहिर करता है कि वतन की बातें कितनी बड़ी हैं, पर इंसानी ज़िन्दगी का सच तो बस बिछड़ना ही है।
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