लुक्नत तिरी ज़बान की है सहर जिस से शोख़ — मीर तक़ी मीर

लुक्नत तिरी ज़बान की है सहर जिस से शोख़ यक हर्फ़-ए-नीम-गुफ़्ता ने दिल पर असर किया

“The curse belongs to your tongue, which, with the dawn, so lovely, When a mere whisper of a word left an impression on the heart.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तेरी ज़बान की लक़्नत है वो सुबह, जो शोख़ है, जिस से एक आधा-अधूरा शब्द भी दिल पर असर कर गया।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर यहाँ शब्दों की विनाशकारी शक्ति को बयां कर रहे हैं। शायर कहते हैं कि महबूब की ज़ुबान का हर लफ़्ज़ एक 'शोख़ सहर' जैसा है—सुंदर, लेकिन खतरनाक। वक्ता महसूस करता है कि सिर्फ़ एक फुसफुसाया हुआ शब्द ही दिल को पूरी तरह से तोड़ सकता है। यह बताता है कि हमारी भावनाएँ कितनी नाज़ुक होती हैं, और कैसे ज़बान का एक छोटा सा इशारा भी एक मीठे ज़हर जैसा असर कर जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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