दरपय-ए-दिल ही रहे उस चेहरे के ख़ाल-ए-सियाह — मीर तक़ी मीर
दरपय-ए-दिल ही रहे उस चेहरे के ख़ाल-ए-सियाह
डर हमें उन चोंटों का रोज़-ए-रौशन में रहा
“The heart's curtain remains that dark face's pallor, We fear those wounds in the bright day's show.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल का पर्दा उस गहरे रंग के चेहरे पर ही रहे, और हमें उन ज़ख्मों का डर है जो रोशन दिन में भी दिखाई देंगे।
विस्तार
यह शेर गहरे इश्क़ की एक अजीब सी बेचैनी बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि महबूब के चेहरे की वो काली छाप... वो दिल पर हमेशा बनी रहेगी। लेकिन असली डर क्या है? वो डर है कि उन निशान (चोंटों) का कोई सबूत, जो सिर्फ़ रात की रौशनी में था, वो अचानक दिन की तेज़ रौशनी में दिख जाएगा! यह एक बहुत ही नाज़ुक एहसास है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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